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तंबाकू से उत्पन्न होने वाले कूड़े को साफ करने के लिए भारत हर वर्ष खर्च करता है ₹5900 करोड़।

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प्रत्येक वर्ष 31 मई को विश्व तम्बाकू निषेध दिवस का समारोह मनाया जाता है। WHO ने इस शुभ अवसर पर एक रिपोर्ट  प्रदर्शित करी जिसमें उन्होंने बताया कि हर साल प्रत्येक देश तंबाकू से हो रहे उत्पादनों के कारण कितना धन क्षय करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत परस्पर वर्ष तंबाकू से उत्पादित कूड़े को साफ करने में 766 मिलियन डॉलर( ₹5900 करोड़) व्यय कर देता है। 

WHO की खबरों के अनुसार प्रत्येक वर्ष तंबाकू उद्योगों के कारण ना सिर्फ़ 8 मिलियन लोगों की जान जाती है, बल्कि 600 मिलियन पेड़, 200,000 बिलियन एकड़ जमीन, 22 बिलियन टन पानी और 84 मिलीयन टन कार्बन डाइऑक्साइड भी व्यर्थ होता है। आंकलन के परिणामो ने जताया की तंबाकू हमारे वातावरण एवं हमारी सेहत के लिए अत्यंत हानिकारक है और इसी कारण WHO ने सभी देशों से तमाकू उद्योगों  के खिलाफ सख्त कदम उठाने की अपील भी की।

WHO के मुताबिक सिगरेट, बिना धुएं वाले तमाकू आदि से पर्यावरण मे प्लास्टिक प्रदूषण बढ़ता है।  तंबाकू से पैदा होने वाले कूड़े की सफाई का पैसा आम जनता को टैक्स के माध्यम से देना पड़ता है। वहीं तंबाकू उद्योगों को तंबाकू की बिक्री से लाभ तो होता है परंतु उसके कारण दूषित वातावरण की सफाई के लिए उन्हें कोई दाम नही देना होता। 

 फ्रांस और स्पेन जैसे सक्रिय देशों ने तो ‘एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी’ का कानून लागू कर दिया है जिसके अंतर्गत तंबाकू उद्योगों से होने वाले प्रदूषण की सफाई की जिम्मेदारी भी उनकी ही होगी।

WHO ने बताया कि अधिकतर तंबाकू न्यूतम और मध्यम आय वाले देशों में पैदा किया जाता है जहां अन्न उगाने के लिए पानी और जमीन की आवश्यकता होती है परंतु यहां जंगल साफ करके जानलेवा तंबाकू के पेड़ उगाए जा रहे हैं।

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WHO ने देशों से अपील की है कि वे भी एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी का कानून लागू करें एवं साथ ही साथ तंबाकु उगाने वाले किसानों को खोजें और उनकी धारणीय फसल उगाने में मदद करें, तंबाकू पर भारी टैक्स लगाएं और तो और, लोगों का तंबाकू छोड़ने के लिए उनको प्रेरणा दें। जब सभी साथ मिलकर मौके की तात्कालिकता को समझेंगे, तभी परिवर्तन संभव हो पाएगा।

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