ब्रिटेन की महारानी दहेज में लेकर आई थीं चाय के डिब्बे, काफी रोचक है Tea की पूरी कहानी

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आज कल चाय के दीवाने हर जगह मिल जायेंगे। भारत में तो चाय के बिना कहीं किसी की सुबह नहीं होती तो किसी का काम में मन नहीं स्थित होता। यह एक सस्ती वस्तु होने के कारण सबके सामर्थ्य में आ जाती है। आज के समय में हर घर में एक चाय का डब्बा जरूर होगा परंतु एक समय ऐसा भी था जब चाय बेशकीमती हुआ करती थी। इसकी कीमत अत्याधिक थी और यह सबके बजट में फिट भी नहीं होती थी। चाय की मूल्यता को हम एक किससे से समझ सकते हैं- इंग्लैंड की महारानी कैथरीन ऑफ ब्रिगेंजा,  शादी के उपरान्त दहेज में अपने साथ चाय के डब्बे लाईं थीं।

चाय के सफर की कहानी काफी रोचक है। भारत के असम में चाय के बगान थे। यहां चाय उगाई जाती है यह बात अंग्रेजों को पता न थी। रॉबर्ट ब्रूस एक साहसी कारोबारी थे जो कारोबार के सिलसिले से ऊपरी असम टीके पहुंचे। वहां वे स्थानीय प्रमुख पुरंधर सिंह के एजेंट बन गए। इस प्रकार ब्रूस को चाय की मौजूदगी का पता चला और उन्होंने चाय का एक पौधा और उसके कुछ बीज अपने पास रख लिए। 

1824 के एक युद्ध में जब ब्रूस की मौत हो गई, तब वह पौधा और बीज उनके भाई के हाथ लग गए और उन्होंने 1825 में इसे ईस्ट इंडिया कंपनी को बेच दिया। कंपनी ने इसे यह कह कर चाय के बीज मानने से इनकार कर दिया कि ये कैमिलिया सिनेन्सिस प्रजाति से ताल्लुक नहीं रखते। 

1662 में पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन ऑफ ब्रिगेंजा शादी होने पर अपने साथ इंग्लैंड में दहेज में चाय के डब्बे लाई, और यह चाय चीन से आयात करी हुई थी। कैथरीन ने ही सबसे पहले दरबार में चाय पेश करवाई थी जिसके बाद वह लोकप्रिय हो गई। चाय की लोकप्रियता के कारण चीन से चाय का आयात बढ़ गया परंतु चीन की  कारोबारी नीतियां बहुत ही सख्त थी एवं वे चाय के निर्यात के बदले में केवल स्पैनिश सिल्वर ही लेता था। परिणामवश इंग्लैंड का चांदी का भंडार कम होता जा रहा था।

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आयात कम करने के लिए इंग्लैंड ने चाय उगाने के लिए अनुकूल जमीन की तलाश प्रारंभ कर दी। इस प्रकार 1883 में भारत में एक कमिटी का धन हुआ जिसका लक्ष्य था रोबर्ट ब्रूस द्वारा की गई खोज की दिशा में आगे बढ़ना। इसके फलस्वरूप 1837 में ब्रूस और सिंगफो कबीले के सदस्य कोलकाता में ईस्ट इंडिया कंपनी को चाय भेजने में सफल रहे। मई 1838 में पहली बार चाय को पानी के माध्यम से कोलकाता से इंग्लैंड भेजा गया। इस चाय की इंग्लैंड में 34 सीलिंग प्रति डिब्बे के हिसाब पर बिक्री हुई।

ऐसी है लोकप्रिय चाय की उत्पतन की कहानी।

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