क्यों डूब रहे हैं तट पे बसे इलाके?

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एक अनुमान लगाते हुए बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) के चीफ इकबाल सिंह चहल ने यह चेतावनी दी कि 2050 तक करीब 80% दक्षिण मुंबई अरेबियन सी में डूब चुका होगा। इस अनुचित दुविधा का मुख्य कारण यह होगा कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से समुद्रों में पानी का स्तर बढ़ रहा है जिसके कारण आस पास के स्थान क्षीण होने लगे हैं। 

चहल ने बताया की अत्यधिक गर्मी एवं मूसलाधार बारिश जैसी अनेको खतरनाक संभावनाएं बन रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर हमने अभी इस परिवर्तन पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले 25 सालों में खौफनाक परिदृश्य देखने को मिलेगा। मुंबई का तापमान बढ़ रहा है, बारिश भी बढ़ रही है और इसी कारण मुंबई धीरे धीरे डूबता जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पहले जलवायु परिवर्तन में सिर्फ ग्लेशियर्ज का पिघलना ध्यान में आता था परंतु अब यह तूफ़ानी मौसम हमे सामने से प्रभावित करने लगा है। आंकलन के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में मुंबई का तापमान, बारिश की अवधि, तीव्रता और दौरा बढ़ गये हहैं। पिछले साल मुंबई में जुलाई की औसत बारिश में से 70% बारिश सिर्फ चार दिनों(जुलाई 16–20) में हो गई थी और मई में जब बिलकुल बारिश नहीं होनी चाहिए,तब भी, तौकते चक्रवात के कारण 200mm बारिश हुई। रिपोर्ट के हिसाब से अरेबियन सी में ज्यादा तर चक्रवात ग्लोबल वार्मिंग की ही वजह से ही होते हैं।

पिछले ही वर्ष के आंकड़ों से पता चला की 5 अगस्त 2020 को मूसलाधार बारिश के कारण दक्षिण मुंबई पानी में 5 फीट डूब गया था। चहल ने बताया कि साइक्लोन की कोई चेतावनी न होने के उपरांत भी, स्तिथि पूरी साइक्लोन वाली ही थी। आगे भी ऐसा ही होने की पूर्ण संभावना है और अनुमान के अनुसार 2050 तक दक्षिण मुंबई का ज्यादातर भाग अरेबियन सी की चपेट में आने के कारण डूब जायेगा।

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IPCC की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगले दो दशक में 1.5 डिग्री पारा बढ़ने का अनुमान किया गया है। यदि भूमि का तापमान इसी गति से बढ़ता रहा, हो भारत के कुछ समुद्रीय निचले इलाके जैसे – मुंबई, सूरत, कोची, चेन्नई व विशाखापट्नम सदैव के लिए ही क्षीण होने के खतरे में हैं। अतः अब हमे हमारी गलतियों को काबू में कर पर्यावरण की ओर खास ध्यान देने की अत्यंत आवश्यकता है, अपितु वह दिन दूर नहीं जब ये बदलाव हमारे वष के बाहर हो जाएंगे।

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