स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि आज जानिए क्यों है आज युवाओं में लोकप्रिय

0
0

आज यानी 4 जुलाई को स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि है।युवाओं में लोकप्रिय स्वामी विवेकानंद का 4 जुलाई 1902 में 39 साल की उम्र में ही निधन हो गया था।स्वामी विवेकानंद के वचन और संदेश युवाओं को प्रेरित करते हैं।4 जुलाई को स्वामी विवेकानंद स्मृति दिवस के तौर पर मनाया जाता है।

स्वामी विवेकानंद वेदांत के विख्यात और प्रभावशाली गुरु थे। स्वामी विवेकानंद का असली नाम ‘नरेंद्र नाथ दत्ता’ है। स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में 1893 में हो रहे विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म की अगुवाई की थी।स्वामी विवेकानंद की ही वजह से भारत की आधुनिकता से परिपूर्ण वेदांत दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर देश में पहुंचा।स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी,जो अभी भी अपना काम कर रहा है।इनके गुरु का नाम रामकृष्ण परमहंस था।अमेरिका में हो रही महासभा में उन्हें 2 मिनट का समय दिया गया था बोलने के लिए और उन्होंने अपने भाषण का आरंभ ‘मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों’ के साथ किया था।उनके इस संबोधन ने सबका दिल जीत लिया था।

स्वामी विवेकानंद अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस से काफी प्रभावित रहते थे।उन्होंने स्वामी विवेकानंद को सिखाया था कि सारे जीवो में स्वयं परमात्मा का ही अस्तित्व है।अपने गुरु से मिलने के बाद उन्होंने अपना नाम विवेकानंद रखा था।जिसका मतलब ‘ज्ञान से हर्षित जीवंत’। उनके गुरु की मृत्यु के बाद विवेकानंद जी ने बड़े पैमाने पर भारतीय उपमहाद्वीप की यात्रा की थी।

स्वामी विवेकानंद के वचन आज के युवाओं में स्फूर्ति भर देते हैं।उनके जीवन के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं। इनके वचनों को पढ़कर हमारे जीवन में नई सुबह का जन्म होता है।

जरूर पढ़े:  क्यों डूब रहे हैं तट पे बसे इलाके?

स्वामी विवेकानंद की कुछ अनमोल वचन-

# उठो जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता।

# खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है।

# एक अच्छे चरित्र का निर्माण हजारों बार ठोकर खाने के बाद ही होता है।

# पहले एक अच्छी बात का मजाक बनता है फिर विरोध होता है और फिर उसे स्वीकार लिया जाता है।

# बाहरी स्वभाव केबल अंदरूनी स्वभाव का बड़ा रूप है।

# एक समय एक काम करो और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।

# जो कुछ तुमको कमजोर बनाता है-शारीरिक,बौद्धिक या मानसिक उसे जहर की तरह त्याग दो।

# हम जो बोलते हैं,वह काटते हैं।हम स्वयं अपने भाग्य के निर्माता हैं।

# सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है फिर भी वह एक सत्य ही होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here